भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनाने की मांग के समर्थन में शुक्रवार को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने भी अपनी आवाज उठा दी है. इससे पहले अमेरिका और फ्रांस ने भी भारत की मांग का समर्थन किया था. यूएनएससी में स्थायी सीट के लिए भारत की मांग के लिए स्टारमर का मजबूत समर्थन संयुक्त राज्य अमेरिका और फ्रांस के नेताओं की ओर से इसी तरह के समर्थन के बाद आया है. मौजूदा समय में, यूएनएससी में पांच स्थायी सदस्य संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, फ्रांस, रूस और यूनाइटेड किंगडम हैं. ये परिषद के मूल प्रस्तावों पर वीटो पावर रखते हैं. परिषद में दो साल के कार्यकाल के लिए चुने गए दस गैर-स्थायी सदस्य भी शामिल हैं. न्यूयॉर्क में आयोजित संयुक्त राष्ट्र महासभा के 79वें सत्र में अपने संबोधन में कीर स्टार्मर ने कहा कि भारत, ब्राजील, जापान और जर्मनी जैसे देशों को स्थायी सदस्यों के रूप में शामिल करने से परिषद की वैधता और प्रभावशीलता बढ़ेगी. कुछ दिन पहले ही फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इसी तरह की भावनाएं जाहिर की थीं. उन्होंने कहा था कि यूएनएससी का विस्तार इसकी दक्षता और प्रतिनिधित्व में सुधार के लिए आवश्यक है.
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने कहा, जर्मनी, जापान, भारत और ब्राजील को स्थायी सदस्य होना चाहिए, साथ ही दो ऐसे देश भी होने चाहिए जिन्हें अफ्रीका इसका प्रतिनिधित्व करने के लिए तय करेगा. इस बयान के बाद चीन और पाकिस्तान को सबसे ज्यादा दर्द होगा, क्योंकि ये दोनों नहीं चाहते हैं कि ग्लोबल पावर में उभरते हुए देश भारत को स्थायी सदस्यता मिले. भारत सुरक्षा परिषद में लंबे समय से लंबित सुधारों को तुरंत लागू करने के लिए संयुक्त राष्ट्र में किए जा रहे प्रयासों में सबसे आगे रहा है और इस बात पर जोर देता रहा है कि वह संयुक्त राष्ट्र के उच्च मंच पर स्थायी सदस्य के रूप में स्थान पाने का हकदार है. भारत की दलील है कि 1945 में स्थापित 15 देशों की परिषद 21वीं सदी के उद्देश्यों के लिए उपयुक्त नहीं है.