पहाड़ी मैदानी विवाद के बीच कैबिनेट मंत्री प्रेम ने सीएम को दिया अपना इस्तीफा

उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने आखिरकार रविवार को इस्तीफा दे दिया है। अपने सरकारी आवास में प्रेस वार्ता में इस्तीफे की घोषणा करने के बाद उन्होंने सीएम आवास पहुंचकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को त्यागपत्र सौंपा। उत्तराखंड विधानसभा के बीते बजट सत्र में उनके एक बयान को लेकर कई दिनों से हंगामा मचा हुआ था. कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने रविवार, 16 मार्च को इस्तीफे की पेशकश करते हुए कहा कि जिस तरह से मेरे खिलाफ माहौल बनाया गया मैं उसे आहत हूं और आज मुख्यमंत्री से मिलकर अपना इस्तीफा देने जा रहा हूं. यह बात कहते हुए प्रेमचंद अग्रवाल भावुक होकर रोने लगे. प्रेस वार्ता के दौरान प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि उनके खिलाफ जिस तरह का माहौल बनाया गया, उससे वह आहत हैं. उन्होंने अपने राजनीतिक संघर्ष को याद करते हुए कहा, आंदोलनकारी रहते हुए मैंने बहुत संघर्ष किया. मुजफ्फरनगर कांड के समय मैं अकेले ट्रक में बैठकर गया. मैंने उत्तराखंड के निर्माण में लाठियां खाईं और अहम भूमिका निभाई, लेकिन आज मुझे टारगेट बनाया जा रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि उनकी बातों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया, जिससे उन्हें गहरी पीड़ा हुई है. हालांकि, उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार की सराहना करते हुए कहा, मुख्यमंत्री धामी के कुशल नेतृत्व में राज्य सरकार बहुत अच्छा काम कर रही है.

बीती फरवरी में हुए बजट सत्र के दौरान सदन में क्षेत्रवाद को लेकर दिए बयान से कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल विवादों में घिर गए थे। हालांकि विवाद बढ़ने पर उन्होंने सदन के अंदर व बाहर खेद भी जताया था। लेकिन इससे मचे सियासी घमासान ने भाजपा को असहज कर दिया था। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने अग्रवाल को पार्टी मुख्यालय में तलब तक स्पष्टीकरण लिया था। रविवार को अग्रवाल ने पत्नी शशि प्रभा अग्रवाल के साथ रामपुर तिराहा स्थित शहीद स्मारक पहुंच कर राज्य आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद यमुना कालोनी स्थित सरकारी आवास पहुंचकर प्रेसवार्ता बुलाई और इस्तीफे की घोषणा कर दी। इस दौरान वह भावुक होकर फफक पड़े। अग्रवाल ने कहा कि उनके जैसे व्यक्ति को साबित करना पड़ रहा है कि उत्तराखंड के लिए क्या योगदान दिया। सदन में उनके बयान को तरोड़ मरोड़ कर पेश किया गया है, इससे वह आहत हैं। कहा, राज्य आंदोलन के दौरान मैंने लाठियां खाई हैं।