वॉशिंगटन डीसी: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत समेत दुनिया के कई देशों पर पारस्परिक टैरिफ (Reciprocal Tariffs) लगाने का बड़ा ऐलान किया है। 2 अप्रैल से लागू इस नई नीति के तहत भारत पर 26% और चीन पर 34% टैरिफ लगाया गया है। इससे भारतीय निर्यातकों और व्यापारिक संबंधों पर गहरा असर पड़ सकता है।
🔹 अमेरिका की “आर्थिक आज़ादी” का ऐलान
व्हाइट हाउस में दिए गए अपने जोशीले भाषण में डोनाल्ड ट्रंप ने इसे अमेरिका के इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण दिन बताया और कहा:
“यह अमेरिकी अर्थव्यवस्था की आज़ादी का दिन है। सालों तक मेहनती अमेरिकी नागरिकों को किनारे कर दिया गया, लेकिन अब अमेरिका को समृद्ध बनाने का समय आ गया है। हमारा देश दूसरे देशों द्वारा लूटा गया है, लेकिन अब यह नहीं चलेगा!”
उन्होंने कहा कि पिछले 50 वर्षों से अमेरिकी करदाताओं को ठगा गया, लेकिन अब वह अमेरिका को दोबारा आर्थिक रूप से मज़बूत बनाएंगे।
🇮🇳 भारत पर 26% टैरिफ – मोदी का दोस्ताना रिश्ता भी नहीं आया काम?
अपने भाषण में ट्रंप ने भारत का खासतौर पर ज़िक्र किया और कहा कि इस फैसले को लेने में उन्हें कठिनाई हुई।
“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में अमेरिका आए थे। वह मेरे अच्छे दोस्त हैं। भारत के साथ हमारे संबंध हमेशा अच्छे रहे हैं, लेकिन अमेरिका को मजबूत करने के लिए हमें 26% टैरिफ लागू करना पड़ा।”
🌍 वैश्विक व्यापार पर असर – भारत और चीन सबसे बड़े निशाने पर!
✅ भारत पर 26% टैरिफ – यह आईटी, फार्मा, टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल और अन्य उद्योगों के लिए चुनौती बन सकता है।
✅ चीन पर 34% टैरिफ – अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध और तेज़ हो सकता है।
✅ अन्य देशों पर भी प्रभाव – अमेरिका ने विभिन्न देशों पर अलग-अलग टैरिफ लागू किए हैं, जिससे वैश्विक व्यापार प्रभावित हो सकता है।
📌 भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से भारत और अमेरिका के व्यापारिक संबंधों में तनाव बढ़ सकता है। हालांकि, मोदी-ट्रंप की दोस्ती को देखते हुए इस टैरिफ पर पुनर्विचार संभव है।