उत्तराखंड सरकार ने जल संरक्षण, पेयजल प्रबंधन और गंगा स्वच्छता को लेकर बड़ी योजना का खाका तैयार कर लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में गुरुवार को सचिवालय में हुई एक अहम बैठक में राज्य की जल आवश्यकताओं को अगले 30 सालों तक सुचारू रूप से पूरा करने के लिए ठोस रणनीति बनाई गई। इस योजना का लक्ष्य वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और जल स्रोतों के संरक्षण पर ज़ोर देना है।
🌊 गंगा जल को शुद्ध बनाने और जल स्रोतों के पुनर्जीवन पर विशेष ध्यान
मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा का जल अंतिम सीमा तक पूरी तरह पीने योग्य हो, इसके लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे।
✅ गंगा और उसकी सहायक नदियों पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) स्थापित किए जाएंगे।
✅ जल स्रोतों, नदियों और जल धाराओं के पुनर्जीवन के लिए जन सहयोग लिया जाएगा।
✅ गंगा की स्वच्छता को लेकर संत समाज, पर्यावरणविदों और जनप्रतिनिधियों से सुझाव लिए जाएंगे।
🚰 जल जीवन मिशन – गर्मियों में जल संकट से निपटने की नई रणनीति
गर्मियों में पेयजल की कमी से बचने के लिए सरकार ने पुराने जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने और नए जल स्रोतों की पहचान करने पर जोर दिया है।
✔️ राज्यभर में जल जीवन मिशन के तहत लगे कनेक्शनों से नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
✔️ पेयजल स्टोरेज टैंकों और टैंकरों की नियमित सफाई की जाएगी।
✔️ पानी की गुणवत्ता की समय-समय पर जांच कर प्राकृतिक जल स्रोतों से अधिक उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा।
✔️ जनपद स्तर पर टोल-फ्री हेल्पलाइन और कंट्रोल रूम की स्थापना होगी ताकि शिकायतों का त्वरित समाधान किया जा सके।
💧 जल सखी योजना – जल प्रबंधन में महिलाओं की भागीदारी
उत्तराखंड सरकार ‘जल सखी’ योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों (SHG) को पेयजल व्यवस्था से जोड़ रही है। इससे स्थानीय स्तर पर जल बिलिंग, बिल सुधार और जल योजनाओं के रखरखाव का कार्य किया जाएगा, जिससे महिलाओं को रोज़गार का भी लाभ मिलेगा।
🌱 जल पुनरुपयोग और पर्यावरण संरक्षण पर जोर
सरकार जल पुनरुपयोग योजना के तहत STP से उपचारित जल को बागवानी, सिंचाई, उद्योगों, नर्सरी, कार वॉशिंग और कृषि में इस्तेमाल करने की योजना बना रही है। इससे जल संसाधनों की बर्बादी रुकेगी और पानी का अधिकतम सदुपयोग होगा।
🌍 उत्तराखंड जलवायु अनुकूल कृषि परियोजना – किसानों को कार्बन क्रेडिट का लाभ!
इस परियोजना के तहत पर्वतीय क्षेत्रों में बंजर भूमि को हरा-भरा बनाने और ग्रीनहाउस गैसों के प्रभाव को कम करने के लिए बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया जाएगा।
✔️ इससे किसानों को कार्बन क्रेडिट का लाभ मिलेगा और उनकी आय में बढ़ोतरी होगी।
✔️ कृषि को अधिक लाभकारी और पर्यावरण के अनुकूल बनाया जाएगा।
🏗️ सरकारी परिसंपत्तियों के पुनः उपयोग और विकास योजनाओं की समीक्षा
मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि राज्य में जिन सरकारी परिसंपत्तियों का उपयोग नहीं हो रहा, उनकी समीक्षा कर सही उपयोग की योजना बनाई जाए।
✔️ सड़कों की खुदाई की समस्या को हल करने के लिए पेयजल विभाग और अन्य विभागों के बीच समन्वय बढ़ाया जाएगा।
✔️ राज्य में बेहतरीन नवाचार और बैस्ट प्रैक्टिस को अपनाने पर जोर दिया जाएगा ताकि उत्तराखंड का जल प्रबंधन मॉडल पूरे देश के लिए मिसाल बने।
📢 उत्तराखंड जल संरक्षण मॉडल – पूरे देश के लिए मिसाल!
मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि उत्तराखंड का जल प्रबंधन मॉडल ऐसा बनाया जाए कि अन्य राज्य भी इसे अपनाएं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड रजत जयंती वर्ष (Silver Jubilee Year) में प्रवेश कर रहा है, और यह प्रदेश नई ऊंचाइयों पर जाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
🔹 बैठक में शामिल अधिकारी
इस महत्वपूर्ण बैठक में उत्तराखंड अवस्थापना अनुश्रवण परिषद् के उपाध्यक्ष श्री विश्वास डाबर, मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, श्री आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव श्री शैलेश बगोली, श्री रणवीर सिंह चौहान, विशेष सचिव श्री पराग मधुकर धकाते, परियोजना निदेशक जलागम नीना ग्रेवाल, अपर सचिव श्री हिमांशु खुराना सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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